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पीरियड्स(periods) क्या होता है

पीरियड्स(periods) क्या होता है

पीरियड्स क्या होता है? आज का हमारा टॉपिक ये है कि हम जानेंगे के पीरियड्स किया होता है और क्यों होता है और हम बहुत कुछ जानेंगे जैसे पीरियड का लेट होने का कारण और भी बहुत कुछ जानेंगे डिटेल में समझ कर।

सबसे पहले हमें ये जानना था कि पीरियड्स क्या होते हैं?  पीरियड्स एक जैविक प्रक्रिया (biological process ) है जो महिला के शरीर में हर महिला होती है।

ये सवाल हर लड़की के दिमाग में आता है जो अनुभवहीनता होती है।

पीरियड्स(periods) आने के लक्षण

पीरियड्स के आने से पहले हमें उसके आने के लक्षण देख जाते हैं, शरीर में दर्द होता है, पेट में दर्द होता है, मूड स्विंग(mood swing) होता है, थकावट होती है, चेस्ट(istan ya chest) में भारी पैन होता है और सुजान जैसे प्रेशंस का सामना करना पड़ता है, उन्हें पता लगता है कि पीरियड्स आने वाले हैं।

पीरियड लेट से आने का क्या कारण है?

अगर किसी लड़की के पीरियड्स लेट हो जाते हैं तो क्यों ये थोड़ा परेशानियाें का विषय है, अगर कभी-कभी पीरियड्स का लेट आना एक सामान्य बात होती है और हर महिला के साइकिल में बदलाव आ सकता है।

सबसे आम कारण है कि उसे तनाव लेना है, जो लड़की के हार्मोन सीधे तौर पर भारी प्रभाव डालते हैं। शरीर का वजन अगर ज्यादा बढ़ जाए या वजन कम हो जाए एक दम से तो ये भी समस्या पैदा करता है, जिसका चक्र डिस्टर्ब हो जाता है।

Hormonal imbalance, thyroid problems, PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) जैसी स्थितियां भी देर से पीरियड्स का कारण बन सकती हैं।

कभी-कभी नई दवा खाने से, अपनी जीवनशैली में बदलाव करने से भी साइकिल को देरी से शुरू होता है और जब लड़की गर्भवती(pregnancy) होती है तो पीरियड्स रुक जाते हैं

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पीरियड्स आते ही लाइफ रुख क्यों हो जाती है?

पीरियड्स के दिनों में लड़कियों को लगता है कि जिंदगी रुक गई है, क्योंकि शरीर में काफी दर्द है, मूड बदलना है, कभी-कभी छोटी सी बात पे गुस्सा आना, चिड़चिड़ा पैन और हार्मोनल बदलाव के साथ-साथ उन्हें अपने रूटीन को एडजस्ट करना पड़ता है। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो अस्थायी है, और इसे समझना और स्वीकार करना ही सबसे महत्वपूर्ण है

only 5 Din But Feels Like War ये काफी लड़कियाँ मानती हैं क्योंकि उनके अंदर की स्थिति हो रही है हा और किया की स्थिति हा वही जानती है। तब उनके ऐसा लगता था हा उनके शरीर के अंदर युद्ध वह हो रहा हा हाहाहा…

purane zamane me period ko इतना बुरा क्यों समझ जाता था? किआ टैब पैड उपलब्ध हैं?

पुराने ज़माने में जिस औरत को पीरियड्स आ जाते थे, तो उसको बुरा या शुद्ध मन जाता था। क्योंकि जब तक किसी ने इन पीरियड्स के बारे में नहीं जाना था, लोगों को ये पता नहीं था, ये होता किया है, बहुत कम लोगों को पता होता था और कोई इसपे बात करना चाहता था उसे मना कर दिया जाता था।

उसके ज़माने में सेनेटरी पैड का नाम-ओ-निशां नहीं था तो वह कॉटन का कपड़ा था या कोई भी कपड़े का टुकड़ा या फिर कोई भी प्राकृतिक सामग्री जैसा पत्ता या कुछ ऐसा से अपना काम चलाती था। लेकिन अब दुनिया बदल गई है, पुरानी सोच से बाहर आ गई है। आज के आधुनिक जमाने में जागरूकता और स्वच्छता उत्पादों के आने से महिलाओं के लिए पीरियड्स को मैनेज करना ज्यादा आसान हो गया है।

सैनिटरी पैड(sanitary pads) कब बने और किसने इसका अविष्कार किया?

सेनेटरी पैड की यात्रा 19वीं सदी में तब शुरू हुई जब 1888 में जॉनसन एंड जॉनसन ने पहली बार सेनेटरी पैड का निर्माण किया। 1920 के दशक में कोटेक्स ब्रांड ने लोकप्रिय बनाया, और 1950 के दशक में मैरी बीट्राइस डेविडसन केनर ने सेनेट्री बेल्ट का आविष्कार करके आधुनिक स्वतंत्रता मदरसा की दुनिया में एक नया अध्याय लिखा।

और इस काम में हमारा हिंदुस्तान भी पीछे नहीं रहा, जबकि भारत में मैसूरम मुरुगनाथम ने ग्रामीण महिलाओं के लिए कम लागत वाली सैनिटरी पैड मशीन से वार्षिक मासिक धर्म स्वतंत्रता को आसान बनाया। इन्हें ‘पैडमैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, और इनकी कहानी एक प्रेरणा है जो महिलाओं की जिंदगी में जागरूकता और इनोवेशन से लेकर कई बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

पीरियड्स प्रॉब्लम का सलूशन

देखिए पीरियड्स का कोई समाधान नहीं हा क्योंकि इससे हमारा शरीर अच्छा रहता है हा पीरियड्स एक तरह से भगवान का उपहार है हा महिलाओं के लिए लेकिन जब आपके पीरियड्स आ जाएं तो आप स्वच्छता का अच्छे से ध्यान रखें, पैड या मासिक धर्म कप का उपयोग करना संक्रमण से बचाता है। अगर ऐंठन या दर्द हो तो गर्म पानी की थैली से पालतू जानवर को गरम करना, तनाव और मूड में बदलाव ध्यान के लिए को कंट्रोल करें। संतुलित आहार लेना, आयरन और कैल्शियम युक्त भोजन खाना और जंक फूड से बचना, साइकिल को भी स्वस्थ बनाना है। 

लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है कि अगर मासिक धर्म अनियमित है या दर्द बहुत गंभीर है तो डॉक्टर की सलाह लेना सबसे अच्छा समाधान है, क्योंकि कभी-कभी हार्मोनल असंतुलन या चिकित्सीय स्थिति भी कारण हो सकती है।

पीरियड्स होने से क्या फायदे होते हैं

पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है हा जो महिलाओं के शरीर को स्वच्छ और रोग मुक्त रखती है हा ये:

स्वस्थ प्रजनन प्रणाली का संकेत (Healthy reproductive system sign)

हार्मोनल संतुलन बना रहता है(Hormonal balance maintain hota hai )

प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया (Natural cleansing process)

प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी (Fertility ke liye zaroori 

स्वास्थ्य संकेत मिलते हैं (Health signals milte hain )

बॉडी रिसेट होती है ( Body reset hoti hai )

FAQ

पीरियड्स कितने दिन के होते हैं?

पीरियड्स आम तौर पर 3-7 दिनों के होते हैं और ज्यादा दर्द 5 दिनों तक होता है। वे तो हर महिला की साइकिल थोड़ी थोड़ी अलग होती है जिसका वक्त आगे पीछे भी हो सकता है

पीरियड्स क्यों होते हैं?

पीरियड्स एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है जिसका गर्भाशय अपनी लाइनिंग को शेड करता है। ये प्रक्रिया प्रजनन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

किस उम्र तक पीरियड्स होते हैं?

जो रिकॉर्ड सामने आया है वो कहते हा के 11-14 साल की उमर में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं और उनका अंत हो चुका है कोई फिक्स नहीं हा लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक 45-50 साल की उम्र तक आखिरी बार रहता है\

Conclusion

आज हमने अपने होने वाले पीरियड्स को जाना या सामने ये सब किया है और क्यों होता है उसके फायदे जाने। मैं उम्मीद करता हूं कि आपको सब चीजें आराम से समझ आ जाएंगी, बस इतना ध्यान रखेंगे पीरियड्स आते रहेंगे लेकिन कभी भी किसी के कहने के चक्कर में कोई गोलियाँ हां कुछ ऐसा मत करना जैसे पीरियड्स रुक जाए तो आप इसका खास ख्याल रखें

disclaimer ब्लॉग मैं बताई होई जान करी इंटरनेट से ली गई हान और इसका काम सिर्फ लोगो को पीरियड्स के बारे में बताना था अगर आपको कोई भी परेशान हो तो अपना डॉक्टर से सलाह जरूर लें

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